भारत सरकार, जल संसाधन मंत्रालय ने दिसम्बर २००२ में : पानी की कमी वाले क्षेत्रों में अधिशेष जल की साझेदारी और अंतरण करने के लिए राज्यों की शीघ्र सहमति लेने के तरीके सुझाने; अलग-अलग परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता के मान दण्डों की जांच के संबंध में मार्गदर्शन देने; सामाजिक-आर्थिक प्रभावों; पर्यावरणीय प्रभावों और पुनः स्थापना योजनाएं तैयार करने; विभिन्न परियोजना रिपोर्टे तैयार करने और उनके कार्यान्वयन के लिए विभिन्न परियोजना घटकों को प्राथमिकता देने; परियोजना को कार्यान्वित करने के लिए एक उपयुक्त संगठनात्मक संरचना तथा परियोजना को निधि उपलब्ध कराने के तरीके सुझाने के लिए नदियों को जोड़ने से संबंधित एक कार्य बल गठित किया था ।
नदियों को आपस में जोड़ने से संबंधित कार्य बल की, जिसके लिए रा.ज.वि.अ.सचिवीय सेवाएं दे रहा था, २००२-०४ तक की अवधि के दौरान पंद्रह बैठकें हुई थीं ।
नदियों को आपस में जोड़ने के संबंध में कार्यबल द्वारा पूरा किया गया कार्य :
v कार्य योजना-। : ३० अप्रैल २००३ को प्रस्तुत की गई जिसमें संभाव्यता अध्ययन एवं विस्तृत परियोजना रिपोर्टों को पूरा करने के लिए समय अनुसूचियों की रूपरेखा, अनुमानित लागतों, कार्यान्वयन अनुसूची, परियोजना के ठोस लाभ एवं फायदों आदि की रूपरेखा दी गई है।
v कार्य योजना-॥ : १६ अप्रैल, २००४ को प्रस्तुत की गई जिसमें परियोजना के लिये निधि उपलब्ध कराने तथा परियोजना के निष्पादन के लिये वैकल्पिक विकल्प दिये गये हैं तथा लागत वसूली के तरीके भी सुझाये गये हैं।
v कार्य बल के अध्यक्ष, मतैक्यता स्थापित करने के लिए विभिन्न राज्यों के मुख्य मंत्रियों से अलग-अलग मिले ।
v कार्यबल ने विस्तृत परियोजना रिपोर्टें (डी.पी.आर) तैयार करने के लिए विचारार्थ विषय (टी.ओ आर) तैयार किया है ।
विस्तृत परियोजना रिपोर्टें तैयार करने और कार्यान्वयन के लिए विभिन्न परियोजना घटकों को प्राथमिकता देते समय कार्य बल ने यह सुझाव दिया है कि आंरभ करने के लिए प्रायद्वीपीय लिंक उपयुक्त घटक हैं ।
चूंकि टी.एफ.-आई.एल.आर. ने सरकार को रिपोर्टें (कार्य योजना । और ॥) प्रस्तुत करने के बाद अपना अधिदेशाधीन कार्य पूरा कर लिया है इसलिए कार्य बल को बंद करने का निर्णय लिया गया था । तदनुसार, कार्यबल को ३१.१२.२००४ से बंद कर दिया गया है और कार्य बल के शेष कार्य को देखने के लिए और आगे की कार्रवाई करने के लिए जल संसाधन मंत्रालय के अधीन नदियों के अंतर्योजन पर एक विशेष प्रकोष्ठ बनाया गया है । नदियों को आपस में जोड़ने के संबंध में पर्यावरण विदों , समाज-विज्ञानियों और अन्य विशेषज्ञों की एक समिति, जो परामर्शी प्रक्रिया से जुड़ी होगी, दिसम्बर २००४ में जल संसाधन मंत्रालय द्वारा गठित की गई है ।
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