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राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण

 

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के प्रायद्वीपीय नदी विकास घटक को ठोस आकार देने के लिए प्रायद्वीपीय नदी प्रणाली के जल संसाधनों के ईष्टतम उपयोग के लिए वैज्ञानिक और यथार्थवादी आधार पर जल संतुलन तथा अन्य अध्ययन करने और संभाव्यता रिपोर्टें तैयार करने के लिए सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम, १८६० के अधीन राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण की स्थापना एक स्वायत्त शासी सोसाइटी के रूप में जुलाई, १९८२ में की गई थी। १९९० में राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य के हिमालय नदी विकास घटक के कार्यों को भी राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण को सौंप दिया गया।  हाल ही में, रा.ज.वि.अ. के कार्यों में और आशोधन किए गए हैं और विभिन्न लिंक प्रस्तावों की विस्तृत परियोजना रिपोर्टें तैयार करने का कार्य तथा राज्यों द्वारा यथा प्रस्तावित अंतंर्राज्यीय लिंकों की पूर्वसंभाव्यता रिपोर्टें तथा संभाव्यता रिपोर्टें तैयार करने का कार्य रा.ज.वि.अ. के कार्यों में शामिल किया गया है।

 

रा.ज.वि.अ. के कार्य :

 

( तत्कालीन सिंचाई मंत्रालय (अब जल संसाधन मंत्रालय) और केंद्रीय जल आयोग द्वारा जल संसाधन विकास के लिए तैयार किए गए राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य के प्रायद्वीपीय नदी विकास एवं हिमालय नदी विकास घटकों की संभाव्यता स्थापित करने के लिए संभावित जलाशय स्थलों और लिंक नहरों को आपस में जोड़ने के प्रस्तावों के विस्तृत सर्वेक्षण व अन्वेषण करना।

 

( निकट भविष्य में बेसिन राज्यों की समुचित आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद विभिन्न प्रायद्वीपीय नदी प्रणाली एवं हिमालय नदी प्रणाली में जल की मात्रा, जिसे अन्य बेसिनों/राज्यों में अंतरित किया जा सकता है, के बारे में विस्तृत अध्ययन करना।

 

( प्रायद्वीपीय नदी विकास एवं हिमालय नदी विकास घटकों से संबंधित योजनाओं के विभिन्न घटकों की संभाव्यता रिपोर्टें तैयार करना।

 

( संबंधित राज्यों की सहमति के पश्चात्‌ जल संसाधन विकास के लिए राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के अधीन नदी लिंक प्रस्तावों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करना ।

 

( राज्यों द्वारा यथा प्रस्तावित अंतंर्राज्यीय लिंकों की पूर्व  संभाव्यता/संभाव्यता रिपोर्ट तैयार करना ।

 

( अन्य वे सभी कार्य करना जिन्हें सोसाइटी उक्त उद्देश्यों को पूरा करने के  लिए आवश्यक प्रासंगिक, पूरक या प्रेरक समझे।


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